मध्य प्रदेश

Singrauli News : ननि अध्यक्ष पर अविश्वास की साजिश ध्वस्त

नौ पार्षदों ने पलटकर दिया कलेक्टर को हलफनामा, हाईकोर्ट से भी रोक

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सिंगरौली  नपानि के अध्यक्ष देवेश पाण्डेय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बड़ा उलटफेर हुआ है। नौ पार्षदों ने कलेक्टर के यहां शपथ पत्र देकर अविश्वास प्रस्ताव को वापस ले लिया है। इस घटनाक्रम से पार्षद अनिल बैस एवं पर्दे के पीछे सक्रिय महापौर रानी अग्रवाल को भी करारा झटका लगा है।

गौरतलब है कि अक्टूबर महीने से ही नगर पालिक निगम सिंगरौली के अध्यक्ष देवेश पाण्डेय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस, बसपा एवं आम आदमी पार्टी के पार्षद कवायद कर रहे थे। तत्कालीन कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला के यहां उक्त दलों के पार्षद दो बार अविश्वास प्रस्ताव को लेकर आवेदन दिये थे। कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला के स्थानांतरण के बाद कलेक्टर गौरव बैनल से भी कांग्रेस, बसपा व आप के पार्षद मिलकर अविश्वास प्रस्ताव की तिथि मुर्कर किये जाने की मांग कर रहे थे। लेकिन इसी बीच कांग्रेस पार्षद अनिल कुमार बैस उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर कर दिया। उच्च न्यायालय के खण्डपीठ द्वारा कलेक्टर को निर्देशित किया गया कि 30 दिवस के अंदर बैठक बुलाएं। 11 दिसम्बर को एकल न्यायाधीश द्वारा यह आदेश पारित किया गया था। उक्त निर्णय के विरूद्ध अध्यक्ष के तरफ से भी उच्च न्यायालय के यहां याचिका दायर की गई। जिसमें न्यायाधीश के द्वारा 11 दिसम्बर 2025 के रिट याचिका में पारित विवादित आदेश को आगामी सुनवाई तिथि तक स्थगित कर दिया गया है। प्रकरण को चार सप्ताह पश्चात सूचीबद्ध किया जाएगा। वहीं इस मध्यावधि में, राज्य शासन को अपना प्रत्युत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इधर उच्च न्यायालय से याचिका कर्ता अनिल कुमार बैस को एक ओर जहां झटका लगा है, वहीं दूसरी ओर नौ पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव को वापस लेने का शपथ पत्र कलेक्टर को सौपा ननि में इस कड़कड़ाती ठण्ड में राजनैतिक पारा गरमा दिया है। बताया जाता है कि कथित पार्षदों के इस हलफनामा से महापौर रानी अग्रवाल को भी एक तरह से बड़ा झटका लगा है। चर्चा है कि महापौर ने अनिल कुमार को आगे कर ननि अध्यक्ष को परास्त करने का पूरा खेल खेला था। लेकिन भाजपा के रणनीतिकारों ने महापौर के सपनों पर पानी फेर दिया है।

पार्षद अनिल एवं मेयर को लगा तगड़ा झटका

नपानि अध्यक्ष देवेश पाण्डेय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का नतीजा पहले से ही करीब-करीब सब को मालूम था। यहां बताते चले कि भाजपा के 45 में 23 पार्षद हैं। इसके बावजूद मेयर को उम्मीद थी कि कांग्रेस एवं बसपा के सहारे अविश्वास प्रस्ताव सफल हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि यह सब कुछ अध्यक्ष पर दबाव बनाने के लिए चाल खेला गया था और पार्षद की चाल भी उल्टी पड़ गई। नौ पार्षदों के अचानक पलटी मार देने से पार्षद अनिल कुमार एवं मेयर रानी अग्रवाल को राजनैतिक लिहाज से करारा झटका लगा है। चर्चाएं हैं कि आगामी दिनों में मेयर की जहां मुश्किलें बढ़ सकती है। वहीं अब इनके खिलाफ अब भाजपा भी अपना रूख कड़ा कर सकती है।

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