Singrauli News: सरई तहसील में लोकायुक्त का ट्रैप, नायब तहसीलदार का बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
नामांतरण के लिए मांगे थे 10 हजार, 3 हजार लेते ही लोकायुक्त ने दबोचा,सरई तहसील में लोकायुक्त का ट्रैप, नायब तहसीलदार का बाबू

सिंगरौली। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत लोकायुक्त संगठन ने जिले में एक और कार्रवाई को अंजाम दिया है। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के स्पष्ट निर्देश पर एवं उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में लोकायुक्त संभाग रीवा की टीम ने सरई तहसील कार्यालय में सफल ट्रैप कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार के बाबू को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 12 जनवरी को की गई, जिसने तहसील कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोकायुक्त कार्यालय रीवा को 7 जनवरी को ग्राम धिरौली निवासी आवेदक रामनारायण शाह पिता गीताशरण शाह उम्र 30 वर्ष ने शिकायत दी थी। शिकायत में उल्लेख किया गया कि उन्होंने सितंबर 2024 में 23.75 डिसमिल भूमि क्रय की थी, जिसका नामांतरण कराने के लिए तहसील कार्यालय सरई में आवेदन दिया गया था। आरोप है कि नामांतरण कार्य के एवज में नायब तहसीलदार कार्यालय के सहायक ग्रेड-3 बड़ा बाबू लखपति सिंह एवं कंप्यूटर ऑपरेटर देवेंद्र जायसवाल द्वारा 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक रीवा के निर्देशन में पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपीगण द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है और इसी क्रम में आरोपी देवेंद्र जायसवाल ने शिकायतकर्ता से 3 हजार रुपए ले भी लिए थे। शिकायत सही पाए जाने पर लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की रणनीति बनाई।
तहसील कार्यालय में दबिश, केस दर्ज
12 जनवरी को लोकायुक्त टीम ने नायब तहसीलदार कार्यालय तहसील सरई के अंदर ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही सहायक ग्रेड-3 लखपति सिंह ने 3 हजार रुपए की रिश्वत राशि ली, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। हालांकि दूसरा आरोपी देवेंद्र जायसवाल मौके पर उपस्थित नहीं पाया गया। दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधित अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व ट्रैपकर्ता अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने किया। ट्रैप दल में निरीक्षक उपेंद्र दुबे, दो स्वतंत्र शासकीय गवाह एवं कुल 12 सदस्यीय टीम शामिल रही, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया को विधिसम्मत तरीके से अंजाम दिया।




